कोलगेट(colgate) success story

कोलगेटदोस्तों आज हम जानेंगे दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली टूथपेस्ट ब्रांड कोलगेट की .कोलगेट आज पूरी दुनिया में सबसे जयादा बिकने वाला टूथपेस्ट है, और यह लगभग हर सौ घरो में से 66 घरों में प्रयोग किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है की मौजूदा समय के इतने बड़े ब्रांड की शुरुवात कैसे हुई ?

शायद नहीं पता होगा , तो दोस्तों बता हूँ की कोलगेट कम्पनी की शुरुवात आज से करीब 210 साल पहले हुई थी | और इसे शुरू करने वाले का नाम था विलियम कोलगेट , जिन्होंने अपनी लाइफ में बहुत सारे संघर्स किये थे | और यह कम्पनी तब टूथ पेस्ट नहीं बनती थी बल्कि साबुन बनाती थी |

और एक इंट्रेस्टिंग बात बताऊ जब कोलगेट का टूथपेस्ट शुरू शुरू में आया था, उस समय यह ट्यूब में नहीं बल्कि शीशे की जार में मिलता था

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तो चलिए दोस्तों यु आपको कन्फुज करने से अच्छा है की मै इस कहानी को आपको शुरू से ही बताता हु |

कोलगेट के फाउंडर विलियम कोलगेट का ज़न्म 25 ज़नवरी 1783 को इंग्लेण्ड के होलिंगबॉर्न में हुआ था|

उनके पिता का नाम रोबर्ट कोलगेट था, जो खेतों में काम कर के अपना और अपने परिवार का पालन पोषड करते थे .लेकिन कुछ सालों बाद 1798 में, वे अपने पुरे परिवार के साथ अमेरिका के मेरीलैंड शिफ्ट हो गए |

जहाँ उन्होंने राल्फ माहेर नाम के एक आदमी के साथ मिलकर साबुन और मोमबत्तियां बनाने का काम शुरू किया, और इस काम में विलियम कोलगेट भी अपने पिता की हेल्प करते थे | लेकिन दुर्भाग्य से यह बिजनस सफल नहीं हुआ , और फिर सिर्फ दो सालों के बाद ही उन्हें यह काम बंद करना पड़ा | जिससे उनकी और उनके परिवार की आर्थिक हालत और भी ख़राब हो गयी |

 

सिर्फ 16 साल की उम्र में विलियम कोलगेट ने घर छोड़ कर काम करने का फैसला किया

और तभी सिर्फ 16 साल की उम्र में विलियम कोलगेट ने घर छोड़ कर काम करने का फैसला किया और कुछ सालों छोटे छोटे काम करने के बाद वे 1804 में न्यु-योर्क सिटी आ गए, जहाँ उन्होंने एक साबुन की फैक्ट्री में काम करना शुरू किया |

और वहां काम करते हुए उन्होंने बिजनस के बहुत सारे गुण सीखे | एक्चुअली उन्होंने सोच लिया था की मै भी आगे चल कर यही बिजनस करूँगा , और इसी लिए उन्होंने कंपनी के काम करने के मेथडस को अच्छे से समजा, और यह भी जाना की लोगों गलतियाँ कहा रहे है, और उन गलतियों से कम्पनी को कैसे नुक्सान हो रहा है |

लगभग दो साल तक काम करने के बाद उन्होंने कंपनी छोड़ दिया और फिर एक छोटे लेवल पर ही सही लेकिन उन्होंने 1806 में साबुन बनाने का अपना बिजनस स्टार्ट किया | और इस कंपनी का नाम उन्होंने “विलियम कोलगेट & कंपनी” रखा |

और फिर दोस्तों जल्द ही विलियम कोलगेट का यह बिजनस तेजी से चल पड़ा, और अब वह अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते दिखाई दे रहे थे |

लेकिन तभी एक साथ ही उन्हें कई बार दिल का दौरा पड़ा, और हेल्थ काफी खराब हो जाने की वजह से, वह कुछ सालों तक बिजनस पर ध्यान नहीं दे सके | जिसके चलते उनकी कम्पनी घाटे में चली गयी |

लेकिन हेल्थ सुधरने के साथ ही उन्होंने फिर से वापसी की और इस बार उन्होंने कंपनी को एक नयी उंचाईयो पर पहुचा दी .

दोस्तों विलियम कोलगेट एक धार्मिक वयक्ति थे, उनका मानना था की उनके पास है जो कुछ भी है, वो ऊपर वाले की वजह से है, इसी लिए उन्होंने अपने अकाउंटेंट को ईश्वर के नाम का एक अकाउंट खोलने को कहा था | जिसमे वह कम्पनी के फायदे का 10वा हिस्सा रखते थे | और फिर उन पैसों को वे अच्छे कामो के लिए दान कर देते |

आगे चल कर जैसे जैसे उनका बिजनस बढ़ा, तो उनका फायदा भी बढ़ा, और उन्होंने भगवान के शेयर में भी बढोतरी की | और फिर धीरे-धीरे उन्होंने अपने फायदे का 50% दान में देना शुरू कर दिया |

 

एक सफल बिजनसमैन बनने के बाद 25 मार्च 1857 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा

और फिर एक सफल बिजनसमैन बनने के बाद 25 मार्च 1857 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा ,और फिर आगे चल कर उनके बिजनस की कमान उनके तीन बेटे रोबर्ट, जेम्स और समुएल ने संभाला, और फिर इस कंपनी को ओरल हाइजीन के क्षेत्र में आगे बढाया | उन्होंने कम्पनी का पहला टूथपेस्ट 1873 में लांच किया, जोकि आज कल की तरह ट्यूब में नहीं बल्कि जार में उपलब्ध होते थे |

लेकिन समय के साथ पैकेजिंग में भी परिवर्तन आया और 1896 से यह टूथपेस्ट ट्यूब में मिलने लगा | और विलियम कोलगेट द्वारा शुरू की गयी साबुन बनाने की कम्पनी ने आगे चल कर साबुन के साथ साथ टूथपेस्ट, परफ्यूम, और सेविंग क्रीम बनाना भी शुरू किया |

और फिर 1928 के बाद यह कंपनी Palmolive पल – मोलिव कंपनी के साथ मिलकर प्रोडक्ट बनाती है ,और आज के समय में इस कंपनी में हजारों लोग काम करते है | और यह दुनिया की 59वी सबसे जयादा वैल्युएबल ब्रांड है |

तो दोस्तों सब मिला जुला कर इस कहानी को बताने का मेरा यही मकसद था कि, यदि आप अभी भी अपनी मंजिल कि खोज में हैं ,या सफलता के लिए संघर्ष कर रहे है, तो हार कभी ना माने | बस कोशिश करते है .

क्युकी कहते है ना की हार मानो नहीं तो कोशिश बेकार नहीं होती कोशिश करने वालों की कभी भी हार नहीं होती |

 

 

 

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