बाटा (Bata ) जूते की success story


,बाटादोस्तों आज हम जानेगे बाटा (Bata ) जूते की सफलता की कहानी ,तो चलिए शुरू करते है…..

दोस्तों हम सभी को यह पता है जिसने लाइफ को खुलकर जीया, उसे मुकाम भी मिले और खुशियां भी और जो सोचता रह गया, वो बस.. सोचता ही रह गया।

हो सकता है कि आपने किसी मंज़िल के लिए सफर शुरू तो किया हो लेकिन बीच रास्ते में ही आपका सामना बहुत सारे मुश्किलों से हो गया हो, ऐसे में शायद आप वापिस लौटने की सोचन रहे होंगे, है ना ? लेकिन मैं कहूँगा कि बीच रास्ते से वापिस आने से पहले, आप एक ऐसी स्टोरी सुनिए जो आपको बताएगी कि जब मंज़िल का सफर शुरू कर ही दिया है, तो अब पीछे मुड़ने का क्या जरुरत ?

और ये सक्सेस स्टोरी है एक ऐसे ब्रैंड की, जो बिलकुल अपना सा लगता है, भले ही इसे हम पैरों में पहनते है, लेकिन ये हमारे दिलों पर राज़ करता है, तो आप तो समज ही गए होंगे की मै किसी बात कर रहा हूँ .जी हाँ दोस्तों मै बात कर रहा हूँ ,दुनिया के जाने माने फूटवियर ब्रांड बाटा की | जिसकी सफलता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है, की एक समय ऐसा भी था की जूते का मतलब ही बाटा हुआ करता था |

लेकिन पैरों से हमारे दिलों पर राज करने वाले बाटा ब्रांड का ये सफर इतना आसान नहीं था. इसकी शुरुवात एक मोची के घर से हुई, और फिर मेहनत लगन ,और अच्छी सोच के दम पर टामस बाटा ने, इसे पूरी दुनिया पर राज करने वाला फूटवियर ब्रांड बना दिया |

तो चलिए दोस्तों इस ब्रांड के सक्सेज स्टोरी को हम शुरू से डिटेल में जानते है |

कहानी की शुरुवात होती है साल 1894 से, जब चेकोस्लो-वाकिआ के शहर ज़लीन में टॉमस बाटा ने, अपने भाई एंटोनिन और बहन एना के साथ मिलकर जूते बनाने की शुरुवात की, और इस कंपनी में उन्होंने 10 एम्प्लोईस भी रखे |

हलाकि टॉमस का यह काम नया बिलकुल भी नहीं था, क्युकी उनकी कई पढ़िया मोची का काम करती चली आ रही थी | लेकिन अपने इस हुनर को इतने बड़े स्तर पर आज़माने का रिस्क केवल टॉमस बाटा ने लिया ।

लेकिन दोस्तों किसी भी काम की शुरुआत, अक्सर अपने साथ बहुत सारी मुश्किलें भी लेकर आती है और ऐसा ही बाटा फॅमिली के साथ भी हुआ, जब कंपनी एस्टेब्लिश करने के अगले ही साल, टॉमस को पैसों की कमी का सामना करना पड़ा और क़र्ज़ में डूबे टॉमस ने लेदर की बजाए कैनवास से जूते बनाने का फैसला किया |

लेकिन उनके इस फैसले ने एक नए आईडिया को जन्म दिया ,और कैनवास सस्ते होने की वजह से उनके बनाये गए जूते बहुत तेजी से पोपुलर होने लगे | इसके बाद कंपनी की ग्रोथ भी बढ़ती चली गयी।

 

कुछ साल बाद, 1904 में… टॉमस अमेरिका गए और ये सीखकर आये, कि वहां पर बोहत सारे जूतों को एक साथ बनाने का कौन सा तरीका अपनाया जाता है, और फिर उस टेक्निक को अपनाते हुए उन्होंने अपनी प्रोडक्शन पहले से कही ज्यादा कर ली |फिर उन्होंने ऑफिसियल लोगों के लिए batovky नाम का के जूता बनाया और इस जूते को इसकी सिम्पलिसिटी, स्टाइल, लाइट वेट और प्राइस के लिए काफी पसंद किया गया, और इसकी पॉपुलैरिटी ने बाटा कंपनी की ग्रोथ काफी हद तक बड़ा दी।

लेकिन आगे चल कर टामस के भाई अन्टोनी की मृत्यु हो गयी और उनकी बहन भी शादी कर चली गयी |

जिससे वे अकेले पड़ गए, लेकिन टॉमस, बिना रुके चलते रहने का इरादा रखने वालों में से थे, उन्होंने अपने छोटे भाईयों को बिजनेस में शामिल कर लिया और किसी भी प्रॉब्लम को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया|

 

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और साल 1912 आते-आते बाटा के एम्पलॉईस की संख्या लगभग 600 से ज्यादा हो चुकी हो चुकी थी।

और 1914 में जब पहला वर्ल्डवॉर शुरू हुआ तो क्वालिटी और कम्फर्ट के लिए पहचानी जाने वाली इस कंपनी को सेना के लिए जूते बनाने का बोहत बड़ा आर्डर मिला, और 1918 तक चली ,इस वर्ल्ड वॉर के दौरान, ऑर्डर्स को टाइम पर पूरा करने के लिए बाटा कंपनी में एम्प्लॉएंस की संख्या दस गुना बढ़ा दी गयी,और इस कंपनी ने बहुत से शहरों में अपने स्टोर्स भी खोल लिए।

दोस्तों टॉमस बाटा के साथ अब तक सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था.

लेकिन वर्ल्ड वॉर ख़तम होने के बाद जबरजस्त मंदी का दौर आया, जो बाटा शू कंपनी के लिए भी बहुत बड़ी प्रोब्लम लेकर आया..
लेकिन इस बार भी टॉमस बाटा ने इन प्रोब्लम्स को बहुत अच्छे तरीके से हंडल किया, और कंपनी के लिए एक रिस्की फैसला लिया.

उन्होंने किया कुछ यूँ की बाटा शूज की प्राइस आधी कर दी, और फिर कंपनी के वर्कर्स ने भी उनका बखूबी साथ दिया ,और अपनी तनख्वाह में 40% की कटौती करने को तैयार हो गये |

और कहते है ना की बिज़नेस असल में टीमवर्क होता है, अगर आपकी टीम आपके साथ है तो कोई भी प्रोब्लम्स आप पर हावी नहीं हो सकता |और बहुत जल्द हाफ रेट के रिस्क और टीम वर्क ने ऐसा कमाल कर दिखाया, कि मंदी के जिस टाइम में बाकी सारी कम्पनीज अपना बिज़नेस बंद करने की कगार पर थी, वही बाटा शू कंपनी को सस्ते और कम्फर्टेबल जूते बनाने के ढेरों ऑर्डर्स मिलने लगे।

बस यहाँ से टामस और उनकी कंपनी बाटा ने कभी भी पीछे मुड कर नहीं देखा ,और धीरे धीरे वह दुनिया की सबसे बड़ी फुटवियर ब्रांड बन गयी |

और मौजूदा समय में बाटा 70 से भी ज्यादा देशो में अपनी पहचान बना चूका है, और पूरी दुनिया में इसके 5200 रिटेल स्टोर्स है , और अगर इस इस शू कंपनी के हेडक्वाटर की बात करें तो वह स्विट्ज़रलैंड में मौजूद हैं |

दोस्तों इस सक्सेसफुल ब्रांड को बनाने टामस बाटा ने ,1932 में इस दुनिया को अलविदा तो कह दिया, लेकिन उनकी जिदगी ने हमें बहुत कुछ सिखा दिया है |

 

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