भगत सिंह

शहीद भगत सिंह Biography

भगत सिंह

शहीद भगत सिंह  -“सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है”-

जिन्हे 23 मार्च 1931 को 23 वर्ष 5 महीने और 23 दिन के अल्प आयु में, ब्रिटिश सरकार द्वारा सुखदेव और राजगुरु के साथ फांसी की सजा दी गई .अगर भगत सिंह चाहते, तो माफी मांग कर फांसी से बच सकते थे, लेकिन मातृभूमि के इस सच्चे सपूत को झुकना पसंद नहीं था .उनका मानना था ,कि जिंदगी तो अपने दम पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो जनाजे उठा करते हैं.

भगत सिंह की विचारधारा महात्मा गांधी से बिल्कुल ही अलग थी .उनका मानना था ,कि अगर हमें आजाद होना है, तो ईट का जवाब पत्थर से देना ही होगा .वह कहते थे,कि जब सत्य का दुरुपयोग हो, तो वह हिंसा बन जाती है ,लेकिन जब सत्य का प्रयोग, किसी सही कार्य को करने में कर रहे हैं .तो वह न्याय का एक रुप बन जाती है .

 

“मेरे सीने में जो जख्म है ,वह सब फूलों के गुच्छे हैं,हमें तो पागल ही रहने दो ,हम पागल ही अच्छे हैं” -भगत सिंह

 

दोस्तों उन्होंने लिखा है, “मेरे सीने में जो जख्म है ,वह सब फूलों के गुच्छे हैं,हमें तो पागल ही रहने दो ,हम पागल ही अच्छे हैं” .भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को पंजाब के, जिला लायलपुर के बंगा गांव में एक सिख परिवार में हुआ था .बंगा गांव जो कि अब पाकिस्तान में है. भगत सिंह का जब जन्म हुआ था, तब उनके पिता सरदार किशन सिंह और उनके चाचा अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह , अंग्रेजो के खिलाफ खड़े होने के कारण, जेल में बंद थे .

भगत सिंह के पैदा होने वाले दिन ही उनके पिता और चाचा को जेल से रिहा किया गया था .इस बात से भगत सिंह के घर में खुशियां और भी बढ़ गई थी .भगत सिंह पढ़ाई के लिए दूसरों सिख्खो की तरह लाहौर की ब्रिटिश वाले स्कूल में नहीं गए थे, क्योंकि वह ब्रिटिश सरकार की शिक्षा नहीं लेना चाहते थे .इसीलिए उन्होंने दयानंद वैदिक हाई स्कूल में जा कर पढ़ाई की .जोकि आर्य समाज की एक संस्था थी |

 

जलियांवाला बाग

1919 में जब केवल 12 साल के थे ,उस समय जलियांवाला बाग में हजारो बेगुनाह लोगों को मार दिया गया. उनके दिमाग में यह बात ठेश कर गई थी, इसीलिए 14 वर्ष की आयु में ही अपने और अपने देश की रक्षा के लिए उन्होंने अंग्रेजों को मारना शुरू कर दिया था .वह हमेशा से ही गांधीजी के अहिंसक होने का विरोध करते थे ,क्योंकि चौरी चौरा कांड में मारे गए बेकसूर लोगों के पीछे का कारण ,अहिंसक होना ही था |

 

चौरी चौरा कांड-

जब चौरी चौरा कांड हुआ था ,उस समय भगत सिंह जी स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे ,लेकिन जब उन्होंने इस घटना के बारे में सुना, तो 50 किलोमीटर पैदल चलकर वह जगह पर पहुंच गए .पहुंचने के बाद उन्होंने जो देखा वह सचमुच बहुत ही ज्यादा दर्दनाक था .भगत सिंह ने उन शहीदों का बदला लेने की ठान ली, और खून से सनी हुई मिट्टी मुट्ठी में भर कर घर लेकर आए |

उसके बाद से ही भगत सिंह ने युवाओं को इकट्ठा करना शुरू कर दिया ,और एक अभियान की शुरुआत की जिसका मुख्य उद्देश्य, ईट का जवाब पत्थर से देकर ,ब्रिटिश राज्य को खत्म करना था .युवाओं पर भगत सिंह का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा .और इसी प्रभाव को देखते हुए ब्रिटिश पुलिस ने ,मई 1927 में भगत सिंह को अपने हिरासत में लिया और उनके ऊपर आरोप लगाया ,कि वह अक्टूबर 1926 में हुए लाहौर बम धमाके में शामिल थे .

 

सुपरस्टार रजनीकांत Biography

 

हालांकि हिरासत में लेने के 5 हफ्ते बाद ,उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था .ब्रिटिश सरकार मजदूरों के विरोध में एक बिल पारित करवाना चाहती थी, क्योंकि उन्हें भारतीय आम लोगों की परेशानियों से कुछ भी लेना देना नहीं था .लेकिन भगत सिंह ,चंद्रशेखर आजाद और उनके दल को यह बिल्कुल भी मंजूर नहीं था. कि देश के आम इंसान की हालत पहले से ही ,गुलामी के कारण खराब हो रखी है .वह और खराब हो जाए, इसी बिल का विरोध करने के लिए ,भगत सिंह और उनके साथी ,बटुकेश्वर दत्त ने ,दिल्ली की केंद्रीय असेंबली में 8 अप्रैल 1929 को बम फेके .बम फेकने का मकसद ,किसी की जान लेना नहीं था ,उस बम के निर्माण के समय ,उसमे में विस्फोटक की मात्रा नहीं के बराबर थी .उनका मकसद ब्रिटिश लोगों को डराना था. ताकि वह बिल पास ना हो सके .

बम फेकने के बाद भगत सिंह और उनके साथियों ने अपनी इच्छा से गिरफ्तारी दे दी ,ताकि यह बात पूरे देश में फैल जाए और देश के अन्य भारतीय लोगों के अंदर भी स्वतंत्रता की भावना पैदा हो सके .देश की आजादी के लिए ,अपनी जान की परवाह किए बिना ,लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह ,राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च 1931 की शाम करीब 7:33 पर फांसी दे दी गई ,और मात्र 23 वर्ष की छोटी उम्र में, इस वीर सपूत ने हंसते हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया ,और उनके नाम के आगे एक और पद में जोड़ दिया गया .”शहीद” शहीद भगत सिंह. दोस्तों व्यक्ति को कुचलकर कभी भी विचारों को नहीं मारा जा सकता .

आज शहीद भगत सिंह हमारे लिए एक बहुत बड़े प्रेरणा स्रोत है .

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत बहुत धंयवाद

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