कादर खान Biography

दोस्तों आज हम बात करेंगे नब्बे के ऐसे अदाकार के बारे में जिन्होंने अपनी एक्टिंग और शानदार कॉमेडी स्किल्स का जादू चला कर ,अपनी हर फिल्म को रोचक बना दिया था. लोग उन्हे उन दिनों कॉमेडी किंग के नाम से भी जानते थे. हम बात कर रहे है अपनी बेहतरीन एक्टिंग और राइटिंग से लोगो के दिलों पर राज करने वाले एक्टर कादर खान के बारे में .


वैसे तो हम फ़िल्मी जगत के इस बेहतरीन सितारे को खो दिए है,लेकिन फ़िल्मी इंडस्ट्री में अपने इस योगदान के लिए ,ये हमेशा ही हमारे दिलों में जीवित रहेंगे, और इनकी लाइफ स्टोरी ऐसी है कि किसी को भी मोटीवेट कर दे .


क़ादर खान जी की जिंदगी के सफर कि शुरुवात होती है 22 अक्टूबर 1937 में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में उनका जन्म हुआ .इनके पिता का नाम अब्दुल रहमान और माँ का नाम इकबाल बेगम ,इनके साथ इनके फॅमिली में तीन और भाई थे ,लेकिन इनके माता -पिता में बढ़ते हुए झगड़ो की वजह से इनके माता -पिता का तलाक हो गया .और फिर इनके माँ की जबरदस्ती दूसरी शादी करा दी गयी , और फिर शादी के बाद ये अपनी परिवार के साथ मुंबई के पास स्थित कमाठीपुरा नाम के जगह पे आ कर रहने लगे .


क़ादर खान का परिवार उस समय काफी गरीब था ,और क़ादर खान जी ने अपने परिवार की स्थिति देख कर बचपन में ही मजदूरी करने की सोची ,लेकिन जब ये बात उनके माँ को पता चली तो, इनकी माँ ने इनको समझाया कि बाल मजदूरी से उनके परिवार कि गरीबी कभी दूर नहीं होगी,और अगर तुम्हे घर की इतनी ज्यादा चिंता है तो तुम्हे मन लगा कर पढ़ाई करनी होगी .
इन्ही बातो का ध्यान रख कर क़ादर खान ने मन लगा कर अपना पूरा ध्यान पढ़ाई में लगा दी .इन्होने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई अपने टॉउन के ही मुन्सिपल स्कूल से की .और आगे चल कर सिविल इंजीनियरिंग से डिप्लोमा कम्पलीट की .उस समय के हिसाब से ये डिग्री बहुत ही मायने रखती थी .


इन्ही बातो का ध्यान रख कर क़ादर खान ने मन लगा कर अपना पूरा ध्यान पढ़ाई में लगा दी .इन्होने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई अपने टॉउन के ही मुन्सिपल स्कूल से की .और आगे चल कर सिविल इंजीनियरिंग से डिप्लोमा कम्पलीट की .उस समय के हिसाब से ये डिग्री बहुत ही मायने रखती थी .

कादर खान
कादर खान

पढ़ाई पूरी करने के बाद 1970 – 1975 तक M .H .SABOO SIDDIK COLLAGE OF ENGINEERING में एक प्रोफेसर के रूप में सेवा दी.हालांकि क़ादर खान शुरू से ही एक्टिंग में काफी रूचि रखते थे, और इसी लिए एक बार “ताश के पत्ते ” नाम के एक नाटक में एक कॉमेडियन का अभिनय किया था .

उनके शानदार एक्टिंग को देख कर ,वहा पर बैठ कर देख रहे दिलीप कुमार जी ने अपनी आने वाली दो फिल्म सगीना (1947 ) और बैराग (1976 ) के लिए उनको साईंन कर लिया .हालाँकि पहले भी इन्होने छोटे -मोटे रोल किये थे, लेकिन ये इनके लिए एक बड़ा ऑफर था.


और दोस्तों बताया जाता है कि क़ादर खान उर्दू और मैथ के काफी अच्छे जानकार थे , और इनकी उर्दू पर अच्छी पकड़ के कारण ,इन्हे फिल्मो में डायलॉग लिखने के भी ऑफर मिलने लगे थे .क़ादर खान जी ने “जवानी दीवानी ” नाटक के अपनी स्क्रिप्ट राइटिंग कि शुरुवात की.और आगे चल कर इन्होने 300 से भी ज्यादा फिल्मो में शानदार अभिनय का छाप छोड़ा और 250 से भी ज्यादा फिल्मो में डायलॉग भी लिखे .


हालाँकि शुरुवाती समय में क़ादर खान विलेन का किरदार निभाने के लिए जाने जाते थे ,लेकिन कहा जाता है कि एक घटना ने उन्हें विलेन से कॉमेडियन बनने पर मजबूर कर दिया .दरअसर उनका बेटा सरफराज स्कूल से लड़ाई कर के घर लौटा और क़ादर खान ने जब लड़ाई का रीज़न पूछा , तो सरफराज से बताया कि स्कूल में उसे सब विलेन और बुरे आदमी का बेटा कह के बुलाते है , और फिर इस घटना के बाद क़ादर खान ने तय किया कि अब वो विलेन का रोल नहीं करेंगे .

और फिर 1983 में फिल्म “हिम्मतवाला” और 1985 के फिल्म “आज का दौर” से कॉमेडी कि तरफ अपना रुख आप लिया .और फिर “मैं खिलाडी तू अनाड़ी ” ,दूल्हे राजा ,कुली नंबर 1 ,साजन चले ससुराल ,अखियों से गोली मारे , चलो इश्क़ लड़ाये,सुनो ससुरजी जैसे सैकड़ो फिल्मो में उन्होंने शानदार कॉमेडी का तड़का लगाया .

क़ादर खान की पर्सनल लाइफ की बात करे तो , इन्होने अज़रा खान से शादी की ,जिनसे इनको 3 बच्चे हुए , सरफराज खान,शाहनवाज़ खान,क़ुद्दूस खान .
बताया जाता है की क़ादर खान को भारत, अफगानिस्तान और कनाडा की भी नागरिकता प्राप्त है.

हालाँकि फिल्म जगत में अपने बहुमूल्य योगदान दे कर के, 81 की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए . लेकिन दोस्तों लेजेंट कभी मरते नहीं ये हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहते है .

दोस्तों मैं उम्मीद रखता हूँ ,कि क़ादर खान जी की लाइफ स्टोरी आपको पसंद आयी होगी .

आप सबका धन्यवाद ||

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